AKHAND MISHRA

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मेरी तलाश

                                  ~मेरी तलाश~


मेरी तलाश अब-तलक अधूरी ही रही..
मैंने जब भी एक सच्चे साथी की राह तलाशी है..
उदासी और निराशा के अलावा कुछ हाथ नहीं आया मेरे..

हो सकता है मेरे सोच की भिन्नता इसकी एक वजह रही हो.. पर मैंने अपनी तरफ से पूरा शत प्रतिशत दिया है इस दोस्ती के रिश्ते को...

किन्तु मैंने सदैव सामने वाले की सोच स्वार्थ और दोगली मानसिकता से भरी पाई है..
मेरे शब्द और विचार कटु सकते हैं परंतु मेरे हृदय और अंतर्मन की मासूमियत कभी दोगली विचारधारा रखने को प्रेरित नहीं करती..

मुझे सरल, रचनात्मक और खुली विचारधारा वाला व्यक्तित्व बहुत ज्यादा आकर्षित करता है उसका कारण केवल यह है कि मैं स्वयं भी ऐसा ही हूं..

आपके समक्ष कुछ और और अंतर्मन में जलन रखना मुझे नहीं आता.. शायद यही वजह है कि मेरी दोस्ती ज्यादा दिन टिकती नहीं..

ऐसे संबंधों में समर्पण और समझ प्रतिपल मनो-मस्तिष्क में विचरण करती रहनी चाहिए अन्यथा मतभेद होते क्षण भर भी नहीं लगता..

मैंने सदैव नि:स्वार्थ भाव से सहयोग के लिए दोस्ती में हाथ बढ़ाया है पर प्रतिक्रिया स्वरूप मुझे उनका सहयोग स्वार्थ वश ही मिला है..

मैंने दोस्तों का झुंड नहीं बनाया केवल एक से गहरा संबंध रखना चाहा है जो नि:स्वार्थ स्नेह से मेरे हृदय के करीब जीवन पर्यंत रहे उसके दुखों और तकलीफों में मैं सहभागी होऊं और वह मेरे में...
फुर्सत के क्षणों में उसके साथ बैठकर हर तरह की बातें और विचार साझा कर सकूं..

जानता हूं यह केवल कल्पना में ही संभव है वास्तव में तो शायद नहीं..!

इसी का परिणाम है कि जिनसे भी मैंने सच्चा संबंध रखा वो अपनी आवश्यकता और स्वार्थ पूरा करने में लगे रहे.. अंतत: मुझे उनसे दूर होना पड़ा क्योंकि मुझे ऐसे लोगों से आत्मग्लानि होती है मेरी विचारधारा ऐसी कतई नहीं है फिर मैं कैसे ऐसा संबंधों का बोझ ढोता रहता..!

मै यह क्यों लिख रहा हूं, "जानते हैं"- क्योंकि मेरे पास ऐसा कोई साथ नहीं है जिससे मैं अपनी अंतर्मन की व्यथा कह सकूं.. वास्तविक भावनाओं की कद्र कर लेना सबके बस की बात नहीं.. 

केवल ये लेखन,कागज-कलम ही मेरे सच्चे साथी हैं जो मेरी भावनाओं को स्वीकार कर उन्हें सच्चा प्यार देते हैं..

जिंदगी की दौड़ में जितना भी पड़ाव अभी बाकी है अगर कहीं किसी राह पर कोई सच्चा साथी मिला तो वह मेरे लिए ईश्वर की किसी अमूल्य कृति से कम नहीं होगा..

फिर मिलते हैं जल्द ही किन्हीं नए विचारों को लेकर तब तक के लिए- "राधे राधे"🙏

अखंड मिश्र 'एके' ✍️
(स्वलिखित)

(Note- Writing or posting the post anywhere without the real name of the author is punishable under the CopyRight Act 1957. All rights reserved.)

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5 Comments

Radhika

09-Mar-2023 04:38 PM

Nice

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Seema Priyadarshini sahay

06-Feb-2022 06:36 PM

बहुत सुंंदर

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